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बासी कढ़ी में उबाल लाने का प्रयास है ठाकरे भाइयों का मिलन, दोनों फूंके हुए कारतूस


मुंबई में आयोजित एक संयुक्त रैली में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे करीब 20 वर्ष बाद एक साथ मंच पर नजर आए । इस भावनात्मक क्षण में दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई भी दी । इस मिलन से दोनों भाइयों के समर्थक , जिनका मनोबल रसातल में है ,खुश नजर आए । कई राजनीतिक विश्लेषक भी अपने अपने नजरिए से इसका आकलन करते नजर आ रहे हैं ।

असल में अब तक दूसरे को ठोकते आए राज ठाकरे और उद्धव के हफ्ता वसूल गुंडों को अब अब कईं सवा सेर मिल गए हैं । महाराष्ट्र के मंत्री नीतेश राणे ने कहा "गुंडों की जगह जेल है । राज में हिम्मत है तो जालिदार टोपी वालो से मराठी में पढ़वाकर दिखाए हिम्मत है तो जावेद अख्तर और आमिर खान से मराठी बुलवाए ।" राणे आगे बोले "हिन्दू होकर हिंदुओं को पीटने वाले राज के गुंडों की अब अच्छी ठुकाई होगी ।" मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में हिन्दू व्यापारियों को पीटने वाले एमएनएस के गुंडों को तत्काल पकड़ने के आदेश दिए । हिन्दू व्यापारियों से उठक बैठक लगवाकर पीटने वालों की लॉकअप में खासी तुड़ाई हो रही है।

इधर महाराष्ट्र में नगर निगम के चुनाव भी होने वाले हैं ।निगम चुनावों से पहले दोनों भाइयों का मिलना एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है ।असल में दोनों भाई फूंके हुए कारतूस साबित हो चुके है । पिछले वर्ष यानी 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 148 सीटों पर लड़कर 132 सीटों पर बंपर चुनावी जीत हासिल की थी । उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ 20 सीट जीत पाई तो राज ठाकरे की MNS सिर्फ 1 सीट पूरे महाराष्ट्र में जीत पाई । 

दोनों ठाकरे भाइयों का कैडर बिखर चुका है । अब वह बाल ठाकरे के नाम पर मराठी अस्मिता का मुद्दा उछालने की फिराक में है , जो वर्तमान दौर में असंभव है । बाल ठाकरे ने जिस समय यह मुद्दा उठाया था उस समय समाचारों का आदान-प्रदान केवल समाचार पत्रों के माध्यम से ही होता था और समाचार पत्रों के मालिकों पर राजनेता अपने अपने हिसाब से दबाव डालकर जो चाहे वह लिखवा देते थे । 

अभी सूचना क्रांति का युग है । कोई भी झूठी बात और उसका तोड़ तुरंत आम जनता तक महज कुछ सेकंड या मिनट में ही पहुंच जाता है । इसलिए अस्मिता के नाम पर फर्जी मुद्दों को उठाना और फैलाना लगभग असंभव कार्य हो गया है । जैसा कि अभी मराठी बोलने वाले मुद्दे पर दिखाई दिया । स्वयं मराठी मानुष इस मुद्दे पर मारपीट करने को गलत बता रहा है ।  

साथ ही यह दोनों भाई अगर साथ मिलते है तो शरद पंवार और कांग्रेस वाली महा विकास आघाड़ी टूट भी जाएगी । इससे गठबंधन आघाडी का जो वोट बैंक है जिसमें मुख्यत: अल्पसंख्यक है वह सब कांग्रेस और शरद पवार के पास चले जाएंगे । उद्धव को इस वोट बैंक से कुछ नहीं मिलना । वहीं मराठी नेताओं में नितीश राणा के साथ एकनाथ शिंदे और कई अन्य महत्वपूर्ण नेता अपने दावेदारी पूरे दम के साथ ठोकते नजर आ रहे हैं । तो मराठी वोट भी पूरी तरह बंटेगा । उत्तर भारतीयों का वोट, इन दोनों भाइयों की एक आने से एक मुश्त होकर भाजपा की झोली में आ जाएगा । तो इन दो भाइयों का मिलन इन दोनों ही पार्टियों को पूर्ण रूप से डूबोने का काम करेगा । देखते हैं आगे क्या होता है।

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