जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित वे अपने घर ले जाएं
मामले पर अब अगली सुनवाई 20 जनवरी को
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते। ये कुत्ते सडक़ों पर क्यों घूमते रहें, लोगों को काटें और डराएं। उन्हें हम ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बैंच ने कहा कि कुत्तों में एक खास तरह का वायरस होता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। अब तक चार दिन की सुनवाई में इमोशन सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिख रही है। जब कुत्ते नौ साल के बच्चे पर हमला करते हैं, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
क्या हम इस पर आंखें मूंद लें। जस्टिस नाथ ने कहा कि हम बच्चों या बुजुर्गों को कुत्ते के काटने से होने वाली हर मौत या हमले के लिए राज्य सरकार पर भारी मुआवजा तय करेंगे। सरकार कुछ नहीं कर रही है। साथ ही उन लोगों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए, जो कह रहे हैं कि हम कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। ऐसा करो, उन्हें अपने घर ले जाओ। कुत्ते इधर-उधर गंदगी क्यों फैलाएं, काटें और लोगों को डराएं? इस मामले में अब अगली सुनवाई 20 जनवरी को दोपहर दो बजे से होगी।
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