ताजा समाचार

20/recent/ticker-posts

अंगदान को महादान बनाए समाज, मिट्टी और आग में न जलाएं बहुमूल्य अंग: डॉ. वाणी गुप्ता


​लखीमपुर खीरी। अन्नदान की तरह ही अब अंगदान के लिए समाज में व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। जिस तरह परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को अन्न बर्बाद न करने की सीख देते हैं, उसी तरह मृत्यु के बाद शरीर के अंगों को मिट्टी में दफनाकर या आग में जलाकर बर्बाद न करने की शिक्षा देकर लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। ​यह विचार स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने व्यक्त किए। अवसर था मेडिकल कॉलेज देवकली में आयोजित 'मेडिकल एल्ट्रिज़्म (परोपकारार्थमिदं शरीरम्)' विषय पर उत्तर प्रदेश के पहले दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन का। 

इस ऐतिहासिक आयोजन में एसजीपीजीआई, केजीएमयू और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। ​कैम्ब्रिज से जुड़े डॉ. अभिषेक रे ने आंत प्रत्यारोपण में भारत बनेगा अग्रणी विषय पर जानकारी दी।

​सम्मेलन के दूसरे दिन यूनाइटेड किंगडम की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक रे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि:
​छोटी आंत और मल्टी विसेरल प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए जीवनरक्षक है जिनकी आंतें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं। ​यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब रोगी नसों के माध्यम से पोषण लेने में असमर्थ हो जाता है। ​उन्होंने कहा कि यूरोप की तरह भारत में भी इस क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है और यह कॉन्फ्रेंस बड़े बदलाव की साक्षी बनेगी।

*​किडनी और लीवर प्रत्यारोपण: मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर*

​केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि किडनी की बीमारी अंतिम चरण में पहुंचने पर प्रत्यारोपण ही एकमात्र प्रभावी इलाज है। भारत में कानूनी, नैतिक और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के कारण अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसे जागरूकता से ही कम किया जा सकता है।

*​लीवर:* अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि लीवर प्रत्यारोपण की सफलता दर निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने छात्रों को आधुनिक बदलावों से अपडेट रहने की सलाह देते हुए कहा कि जागरूकता के अभाव में डोनर नहीं मिल पा रहे हैं।
​नेत्रदान और रक्तदान: एक डोनर, कई जीवन

*​नेत्रदान:* केजीएमयू के डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि एक मृत व्यक्ति के स्वस्थ कार्निया से दो नेत्रहीन लोगों को रोशनी मिल सकती है।

*​रक्तदान:* ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रो. डॉ. तुलिका चन्द्रा ने चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में रक्तदाताओं का प्रतिशत अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक यूनिट ब्लड 4 जिंदगियां बचा सकता है और खून का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है।

*​मोहन फाउंडेशन का जागरूकता अभियान*

​हैदराबाद स्थित मोहन फाउंडेशन की कंट्री हेड ललिता रघुराम ने कहा कि परिजनों की सहमति से लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज में हुआ यह सम्मेलन अंगदान की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ेगा। वहीं, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग के डॉ. कौशल किशोर अग्रवाल ने नकली दांत और डेंटल इम्प्लांट के माध्यम से जीवन आसान बनाने की तकनीक साझा की

*​सहयोगी टीम*
​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में उपप्रधानाचार्य डॉ. राजेश झिंगरन, डॉ. मीनाक्षी शर्मा, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. अपर्णा दीक्षित, डॉ. जॉन जेब रिज़वी, डॉ. विकास तिवारी, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. इन्द्रेश रजावत, डॉ. विनीत कुमार, डॉ. अखिलेश वर्मा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. कमलेन्द्र वर्मा, डॉ. विकास कुमार, डॉ. जगभान सिंह, डॉ. अभिषेक गुप्ता, डॉ. सोमेश वाजपेयी, डॉ. मृदुलेश कुमार यादव, डॉ. नीति सोलंकी और डॉ. शिखा पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Post a Comment

0 Comments