#असम पुलिस की FIR से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा की जमानत याचिका के दौरान उनके आधार कार्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
#मोदी विरोध में अंधे हो चुके कांग्रेस नेतृत्व ने जब अपने 'तपस्वी सेवक' पवन खेड़ा के माध्यम से, मतदान के ऐन पहले कूटरचित पासपोर्ट के जरिए हेमन्ता विश्व सरमा पर आरोप लगवाया, तो खेड़ा को लगा कि तपस्या सफ़ल हुई... और इस बार राज्यसभा सीट पक्की!
#पर जब दांव उल्टा पड़ गया, तो पहले तो खेड़ा ने हेमन्ता को उन पर FIR करने के लिये ललकारा—यह सोचकर कि चुनावी बेला में शायद उन पर कोई कार्यवाही अभी ना हो। लेकिन जल्द ही FIR हो गई, तो खेड़ा तेलंगाना भाग खड़े हुए कि वहां की कांग्रेस सरकार उनकी जान बचा लेगी... पर यहाँ तो जैसे कुंए में ही भांग पड़ी थी!
#तेलंगाना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) मांगने पहुंचे पवन खेड़ा के एक और फ्रॉड की वहां असम के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने पूरी पोल खोलकर रख दी।
#जमानत याचिका के साथ जो आधार कार्ड की कॉपी लगाई गई थी, वह जालसाजी का एक अनोखा और हास्यास्पद नमूना निकली।
#आधार के फ्रंट पेज पर पवन खेड़ा की जानकारी थी, जबकि पीछे वाले पेज पर उनकी पत्नी कोटा नीलिमा की डिटेल्स छपी थीं ।
#यह एक ही आधार कार्ड में मियां-बीवी का 'टू-इन-वन' जुगाड़ है, जिसे देखकर कोई भी अपना माथा पीट लेगा!
#असम के AG ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि यह सीधा-सीधा न्यायपालिका को गुमराह करने का एक आपराधिक प्रयास है ।
#अदालत ने भी इस भारी विसंगति को गंभीरता से नोट किया और इस फर्जीवाड़े पर हैरानी जताई। फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित (order reserved) रख लिया है ।
असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ फर्जी बयानबाजी करने वाले खेड़ा अब खुद जालसाजी के इस गंभीर मामले में बुरी तरह घिर चुके हैं।
#यह पूरी घटना इस बात को पुख्ता करती है कि कांग्रेस अब सच में "Party of Frauds" का रूप ले चुकी है। जो नेता देश की अदालत में एक पहचान पत्र के साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी कर सकता है, उसकी सच्चाई किसी से छिपी नहीं रहनी चाहिए।
साभार: Manoj Kumar Mishra जी
0 Comments