लखीमपुर खीरी 29 अक्टूबर। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल पर बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी के नेतृत्व में जिले के सभी 3106 परिषदीय विद्यालयों और 16 केजीबीवी में बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रदूषण रहित दीपावली मनाने के उद्देश्य से पटाखा मुक्त दीपावली अभियान के तहत आज दूसरे दिन कई प्रतियोगिताएं और गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक और सुरक्षित तरीके से दिवाली मनाने की प्रेरणा देना और पटाखों से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि सभी परिषदीय विद्यालयों में ‘प्रदूषण रहित दीपावली’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने रंगों के माध्यम से दीपावली के विभिन्न रूपों को दर्शाया और प्रदूषण मुक्त दीपावली के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। "स्वस्थ दीपावली, हरित दीपावली" विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण, पटाखों के नुकसान और दिवाली के सकारात्मक संदेश पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों को मिट्टी के दीयों और सजावटी सामग्रियों का उपयोग करके दीप सजाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य पारंपरिक दीप सज्जा को बढ़ावा देना और पटाखों के स्थान पर दीयों से रोशनी करने की प्रेरणा देना है। रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने फूलों और प्राकृतिक रंगों से खूबसूरत रंगोली बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया और पटाखा मुक्त दीपावली का संदेश दिया।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इन गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को जागरूक करना और उन्हें यह सिखाना था कि दीपावली जैसे महापर्व को पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी मनाया जा सकता है।
कार्यक्रम प्रभारी जिला समन्वयक एमआईएस पुष्पेंद्र श्रीवास्तव ने बताया इन कार्यक्रमों से बच्चों में सकारात्मक सोच का विकास हुआ और उन्होंने दीपावली के पर्व को सुरक्षित और प्रदूषण रहित तरीके से मनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षकों, अभिभावकों और एसएमसी सदस्यों ने भी बच्चों को पटाखा मुक्त दीपावली का संदेश दिया और उनका उत्साहवर्धन किया।
पटाखा मुक्त दीपावली का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे त्योहारों को पारंपरिक और सुरक्षित तरीके से मनाया जा सकता है।
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