तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाई लाई नई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)’ पर सवाल उठाते हुए इसे हिंदी को बढ़ावा देने वाला साधन बताया है। भाषायी आधार पर घृणा फैलाने की कोशिश पर पीएम मोदी ने कहा कि भाषाओं के बीच कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु सरकार पर सुधारों को राजनीति में बदलने का आरोप लगाया है।
प्रधान ने कहा, “किसी भी राज्य या समुदाय पर कोई भी भाषा थोपने का सवाल ही नहीं है।” वहीं, भाषायी आधार पर राजनीति की जमीन तलाश रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ कि तमिल लोगों को फिर से न भड़काया जाए। मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर न फेंके। जब तक मैं और डीएमके यहांँ हैं, आप (केंद्र सरकार) यहाँ प्रवेश नहीं कर सकते।”
उधर धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर सीएम स्टालिन ने कुड्डालोर में शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को कहा, “केंद्रीय मंत्री का दावा है कि तमिलनाडु को 5,000 करोड़ रुपए नहीं मिले, क्योंकि हमने NEP योजनाओं को लागू नहीं किया। अगर हम तमिलनाडु से एकत्र किए गए करों का भुगतान करने से इनकार करते हैं तो वे क्या करेंगे? संघवाद आपसी सहयोग पर आधारित है, जो हमारे संविधान की नींव है। दुर्भाग्य से, जो लोग इस दर्शन को नहीं समझते हैं वे आज देश पर शासन कर रहे हैं।”
सस्टालिन ने दोहराया कि एनईपी शिक्षा के विकास के लिए नहीं बल्कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पेश की गई थी। उन्होंने कहा, “चूँकि लोग सीधे क्रियान्वयन का विरोध करेंगे, इसलिए वे इसे धीरे-धीरे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री दावा करते हैं कि वे क्षेत्रीय भाषाओं का विकास कर रहे हैं, लेकिन हम तमिल का विकास करना जानते हैं। उनसे पूछिए जिन्होंने हिंदी थोपे जाने के कारण अपनी मातृभाषा खो दी है। तमिल को अपने विकास के लिए उनके समर्थन की आवश्यकता नहीं है।”
स्टालिन का कहना है, “एनईपी के नाम पर वे हमारे बच्चों को पढ़ाई, स्कूलों में प्रवेश और नौकरी पाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। ये ठीक वैसे ही कर रहे हैं, जैसे सौ साल पहले लोगों पर अत्याचार किया जाता था। एनईपी को सामाजिक न्याय को नष्ट करने के लिए पेश किया गया है। यह बीसी, एमबीसी और एससी समुदायों की प्रगति को अवरुद्ध करेगा।”
उधर, केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्टालिन के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोप रही है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया के जरिए मुझे पता चला कि तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने राजनीतिक प्रेरणा से भरे उस पत्र में कुछ काल्पनिक चिंताओं जताई हैं।”
प्रधान ने कहा कि NEP का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा का विश्व मानकीकरण करना और उसे भारतीय जड़ों से जोड़ना था। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु जैसे राज्यों की भाषायी और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है। भारत सरकार सभी प्रवेश परीक्षाएँ सभी प्रमुख 13 भाषाओं में आयोजित कर रही है और उनमें से एक तमिल भी है।”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि पीएम मोदी की सरकार तमिलनाडु की भाषा और विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर तमिल विचारों को बढ़ावा देने के लिए सिंगापुर में भारत के पहले तिरुवल्लूर सांस्कृतिक केंद्र की घोषणा की।”
इस बीच पीएम मोदी ने शुक्रवार (21 फरवरी) को कहा कि भारत की भाषाएँ हमेशा से एक-दूसरे के साथ रही हैं। बिना किसी दुश्मनी के वे एक-दूसरे को प्रभावित और समृद्ध करती रही हैं। यह बात उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा। पीएम मोदी ने कहा, “जब भाषाओं के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई तो भारत की साझा भाषायी विरासत ने इसका माकूल जवाब दिया। गलत धारणा से दूर रहें।”
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