अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो को बर्खास्त करने की मांग उठी है। हिंदूपैक्ट के अमेरिकन हिंदूज अगेंस्ट डिफेमेशन (एएचएडी) ने यह मांग की है। पीटर नवारो के ब्राह्मणों पर दिए गए बयान को 'अनुचित और हिंदूफोबिक' करार दिया गया है। हिंदू समूह ने नवारो की जाति से संबंधित टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। एएचएडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नवारो की बयानबाजी न केवल सांस्कृतिक अपमान है, बल्कि एक लापरवाह उकसावे की कार्रवाई भी है, जो एक अरब से अधिक हिंदुओं की गरिमा को खतरे में डालती है और विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच संबंधों को कमजोर करती है। नवारो जैसे लोगों के लिए अमेरिकी राजनीति में जगह नहीं
समूह ने नवारो की 'ब्राह्मणों द्वारा भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफा कमाने' वाली टिप्पणी की निंदा की और इसे औपनिवेशिक रूढ़िवादिता बताया। समूह ने कहा कि यह आलोचना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल का दुष्प्रचार है, जिसे हिंदू समाज को बांटने और भारत को स्वाभाविक रूप से अन्यायपूर्ण दिखाने के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है। हिंदूपैक्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अजय शाह ने कहा कि यह विदेश नीति नहीं, बल्कि हिंदूफोबिया को हथियार बनाकर बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक विचारों से हिंदुओं को बांटने से रिश्ते नहीं बनते, बल्कि टूटते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नवारो जैसे लोगों के लिए अमेरिकी राजनीति में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
समूह ने नवारो द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भगवा वस्त्र में एक तस्वीर साझा करने की भी निंदा की। समूह ने कहा कि यह तस्वीर हिंदू आध्यात्मिकता का मजाक उड़ाने और भारत पर आर्थिक दबाव डालने के लिए साझा की गई थी। तस्वीर पर टिप्पणी करते हुए हिंदूपैक्ट की अध्यक्ष दीप्ति महाजन ने कहा कि अगर निशाना हिंदू धर्म था, तो यह धार्मिक शत्रुता है। अगर निशाना भारतीय नेतृत्व था, तो यह कूटनीतिक लापरवाही है। किसी भी तरह, यह एक गंभीर उल्लंघन है।
एएचएडी की वेबसाइट के अनुसार, यह एक हिंदू वकालत और निगरानी समूह है, जो हिंदू धर्म, इसके प्रतीकों और संस्कृति के खिलाफ मानहानि, गलत बयानी और पूर्वाग्रह को संबोधित करने और उसका मुकाबला करने के लिए समर्पित है। यह संगठन 1997 में विश्व हिन्दू परिषद अमेरिका (VHPA) की पहल के रूप में स्थापित हुआ और अब हिन्दूपैक्ट का हिस्सा है।
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