जोधपुर: प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में पुलिस ने महत्वपूर्ण खुलासा किया है. शनिवार को जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि उनकी मृत्यु किसी प्राकृतिक कारण से नहीं हुई, बल्कि कार्डियक अरेस्ट और पल्मोनरी अरेस्ट (हृदय और श्वसन गति रुकने) के कारण हुई. एफएसएल तथा हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट से स्पष्ट हो चुका है कि उनके शरीर में किसी प्रकार का जहर या विषाक्त पदार्थ नहीं मिला, साथ ही किसी भी तरह का सेक्सुअल एब्यूज भी नहीं हुआ.
इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग कर्मी की लापरवाही: पुलिस कमिश्नर ने बताया कि साध्वी को जिस नर्सिंग कर्मी देवी सिंह ने इंजेक्शन लगाया, उसका व्यवहार उपेक्षापूर्ण था. लगाए गए इंजेक्शन शेड्यूल एच श्रेणी के थे, जिन्हें बिना अधिकृत चिकित्सक की पर्ची के नहीं लगाया जा सकता. देवी सिंह खुद इंजेक्शन लेकर आया था, लेकिन अभी तक उससे संबंधित कोई पर्ची नहीं मिली है. हालांकि, इंजेक्शन के कारण ही कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट हुआ या नहीं, इस पर एक्सपर्ट मेडिकल ओपिनियन अभी बाकी है.
संभावित कानूनी कार्रवाई और जांच की स्थिति: कमिश्नर ने कहा कि एक्सपर्ट रिपोर्ट मिलने के बाद भारतीय न्याय संहिता तथा चिकित्सकीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी. सभी विकल्प खुले हैं, जिसमें गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करना भी शामिल हो सकता है. एसआईटी ने कुल 44 लोगों के बयान दर्ज किए और 106 लोगों की कॉल डिटेल्स की जांच की. साध्वी के पिता की भूमिका भी जांच में शामिल थी, लेकिन उनकी ओर से मौत के बाद लोगों को इकट्ठा करने के लिए किए गए कॉल भावुकता में थे और जांच में उनकी कोई संदिग्ध भूमिका नहीं पाई गई.
पुलिस ने स्पष्ट किया कि साध्वी द्वारा पूर्व में दर्ज कुछ प्रकरणों से जुड़े लोगों की कोई भूमिका सामने नहीं आई. साध्वी के पिता द्वारा सोशल मीडिया पर "न्याय" का संदेश पोस्ट करने के बारे में कमिश्नर ने बताया कि वह मैसेज उन्होंने ही लिखवाया था, जिसका मकसद सिर्फ लोगों की भीड़ जुटाना था. जांच अभी जारी है और एक्सपर्ट मेडिकल ओपिनियन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. फिलहाल, मामले में कोई साजिश या जानबूझकर हत्या के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन लापरवाही के कारण मौत होने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है.
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