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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से बेहद खौफनाक धमकी दी


ईरानी विदेश मंत्री के रूस दौरे से आगबबूला हुए ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर तीन दिन के भीतर ईरान किसी शांति समझौते पर नहीं पहुंचता है, तो उसकी तेल पाइपलाइनों में भयंकर विस्फोट कर दिया जाएगा।*

*फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि इस हमले के बाद ईरान दुनिया में एक बूंद तेल निर्यात करने के लायक नहीं बचेगा।* 

*ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि नाकेबंदी के कारण ईरान पहले ही जहाजों के जरिए निर्यात नहीं कर पा रहा है और अब पाइपलाइन ध्वस्त होने के बाद उसका पूरा व्यापार एकदम से बंद हो जाएगा।*


💥🌏 *रूस दौरे से बढ़ा तनाव, अब सिर्फ फोन पर होगी बातचीत* 💥🌏

*दरअसल, ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे। लेकिन, ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल (वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर) को इस्लामाबाद भेजने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री ओमान होते हुए सीधे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने मॉस्को पहुंच गए। रूसी मीडिया ने भी उनके मॉस्को पहुंचने की पुष्टि की है। ईरान के इस कदम से नाराज ट्रंप ने ऐलान किया है कि अब उनकी टीम वार्ता के लिए बेवजह सफर नहीं करेगी। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान जब चाहे उन्हें फोन कर सकता है और अब जो भी बातचीत होगी, वह सीधे फोन पर ही होगी।*


💥🌏 *खारिज हुआ पहला प्रस्ताव, ईरान ने भेजा नया ड्राफ्ट* 💥🌏

*बता दें कि 11 और 12 अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा था। इसके बाद ईरान ने ट्रंप को एक लिखित प्रस्ताव भेजा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने तुरंत ही सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि, ट्रंप ने खुद यह दावा किया है कि पहले प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ईरान की तरफ से दूसरा प्रस्ताव मिला है, जो पहले की तुलना में काफी बेहतर है। ट्रंप ने अपनी सख्त चेतावनी दोहराते हुए कहा है कि अगर बात नहीं बनी तो ईरान की तेल पाइपलाइनों को इस कदर तबाह किया जाएगा कि वह दोबारा वैसी पाइपलाइन कभी नहीं बना पाएगा। वहीं, ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक उनके विदेश मंत्री युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के ढांचे पर ईरान के रुख से दुनिया को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब आगे की सारी बातचीत मॉस्को से ही तय होगी।*









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