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मां के बाद बेटे पर हमलावर भाजपा, राहुल गांधी को भी मिल सकता है विशेषाधिकार हनन का नोटिस



लोकसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या होता है?

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Notice) संसद में एक महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी सदस्य, समिति या सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन होता है। संसद के सदस्यों को कुछ विशेषाधिकार दिए जाते हैं ताकि वे स्वतंत्र रूप से और बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। यदि कोई व्यक्ति या सदस्य इन विशेषाधिकारों का हनन करता है या सदन को गुमराह करता है, तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन ?

• यदि कोई सांसद झूठे या भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करता है।

• यदि कोई बाहरी व्यक्ति या संस्था संसद के कार्यों में बाधा डालती है या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाती है।

• यदि कोई सदस्य सदन में गलत या अप्रमाणित दावा करता है और उसे साबित नहीं कर पाता।

कैसे लाया जाता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?

• कोई भी सांसद लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को लिखित रूप में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के लिए नोटिस दे सकता है।

• अध्यक्ष नोटिस की समीक्षा करने के बाद तय करते हैं कि प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं।

• यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो इसे विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) को भेजा जाता है।

विशेषाधिकार समिति की भूमिका

• समिति मामले की जांच करती है और रिपोर्ट तैयार करती है।

• यदि किसी सदस्य को दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

कार्रवाई में चेतावनी, निंदा, निलंबन या अन्य दंडात्मक उपाय शामिल हो सकते हैं।


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