नई दिल्ली : लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार से पूछा है कि पाकिस्तान के साथ चले युद्ध में कितने विमानों का नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी दे. कांग्रेस पार्टी के इस सवाल को रक्षा विशेषज्ञों ने अनुचित कहा है. उनका कहना है कि जब तक ऑपरेशन खत्म नहीं हो जाता है, तब तक इस तरह के सवाल नहीं उठाने चाहिए, क्योंकि इससे दुश्मन को मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता है.
रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव कटोच ने कहा कि उन्हें लगता है कि राहुल गांधी को पूरी सूचना नहीं मिली है. उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर को दो चरणों में कार्यान्वित किया गया. पहले चरण में हमने नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया. इसमें किसी भी सिविलियन ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. साथ ही हमने यह भी कहा था कि हम इसे एस्कलेट नहीं करना चाहते हैं. इसके बावजूद पाकिस्तान ने एस्कलेट कर दिया. उसके बाद हमने भी उचित जवाब दिया. हमनें उनके हमले की धार को कुंद कर दिया. इस ऑपरेशन के किसी भी चरण की कोई भी जानकारी पाकिस्तान को कैसे दी जा सकती है. हां, ऑपरेशन के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि हमने हमले के बाद पाकिस्तान को कह दिया था कि वो कोई भी सैन्य प्रतिक्रिया न दे, अन्यथा स्थिति और भी खराब होगी. फिर भी पाकिस्तान ने प्रतिक्रिया को चुना, और उन्हें उसकी सजा मिल गई."
कटोच ने कहा कि राहुल गांधी या तो समझ नहीं सके, या फिर उन्हें पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि राहुल जिस स्तर के नेता हैं, उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वे इस तरह के सवाल पूछें. उन्हें भी पता है कि जब भी कोई युद्ध होता है, तो वहां पर नुकसान होता है, लेकिन कोई भी देश अपने आप से यह सवाल नहीं पूछता है कि कितना नुकसान हुआ, वह भी तब जबकि ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ है. कटोच के अनुसार राहुल को तो यह पूछना चाहिए था कि भारतीय सेना या फिर उनके ठिकानों पर जो हमले किए गए, उनका सही जवाब दिया गया था या नहीं, मुझे उम्मीद है कि आगे से वे इस तरह के सवाल नहीं पूछेंगे.सेना के एक अन्य एक जवान ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकियों और उनको सपोर्ट करने वालों का काम समाप्त करना था, और हमने बखूबी अपना काम किया और हमें कोई भी हानि नहीं हुई, हमारा निशाना अचूक था, इसलिए दुश्मन ने हमारे नागरिक ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए थे, उन्हें भारी नुकसान हुआ है.
रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी ने कहा कि जब तक कोई भी युद्ध समाप्त नहीं हो जाता है, तब तक यह भारत सरकार पर निर्भर है कि वह कब अपने नुकसान के बारे में बताए, ताकि दुश्मन इसका फायदा न उठा पाए. पाकिस्तान को पता था कि भारत बदला लेगा, हमने यह नहीं कहा था कि कहां हमला करेंगे, लेकिन सबको पता है कि दोनों ही ओर से सैन्य ठिकानों पर हमले होंगे, यह कॉमन सेंस है, सरकार को आप जवाब देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं, वह भी तब जबकि तनाव जारी हो और सुरक्षा के लिहाज से भी यह उचित नहीं होगा.
हालांकि, राहुल गांधी की बातों का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता पृथ्वी राज चव्हाण ने कहा कि 1962, 1965, 1971 और 1999 में भी, जब भी ऐसी परिस्थिति आई थी, संसद का सत्र बुलाया गया था और एक स्वर से संकल्प पारित किया गया था, यह तो सरकार की जवाबदेही है कि वह सभी सवालों के जवाब दे, और ऐसा पूछकर राहुल गांधी ने कौन सी बड़ी गलती कर दी है, क्या सरकार जनता को कोई जवाब देना नहीं चाहती है.
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