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नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर: इमरजेंसी में इस ताकत का इस्तेमाल करेगी सेना, सरकार ने दे दी छूट




 ऑपरेशन सिंदूर की मार से पाकिस्तान अब तक उबर भी नहीं पाया है कि उसके लिए भारत से एक और टेंशन वाली खबर आ गई. दरअसल भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ, इसे बस ‘रोका’ गया है. पाकिस्तान ने अगर सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं किया तो अगली कार्रवाई के लिए भारत तैयार है. इसी ऐलान के तहत केंद्र सरकार ने अब सेना को 40,000 करोड़ रुपये तक की आपातकालीन खरीद (EP) की मंजूरी दे दी है.

*ऑपरेशन सिंदूर: इमरजेंसी में इस ताकत का इस्तेमाल करेगी सेना, सरकार ने दे दी छूट:*
सरकार ने अब सेना को 40,000 करोड़ रुपये तक की आपातकालीन खरीद की मंजूरी दे दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने कुछ ही दिन पहले ईपी-6 योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत थलसेना, वायुसेना और नौसेना को अपने हथियार भंडार को तेज़ी से बढ़ाने और भरपाई करने की छूट दी गई है.

*40 दिनों में करार, एक साल में सप्लाई:*
रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘ईपी-6 के तहत हर कॉन्ट्रैक्ट की अधिकतम सीमा 300 करोड़ रुपये होगी. सभी सौदे 40 दिनों के भीतर फाइनल करने होंगे और डिलीवरी एक साल के भीतर करनी होगी. इन खरीद की जिम्मेदारी तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों को दी गई है.’ इस आपात खरीद के तहत सेना को मिसाइलें, लंबी दूरी के हथियार, ‘लोइटर’ और ‘प्रेसिजन गाइडेड म्यूनिशन’, कामिकाजे ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम समेत अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद खरीदने की छूट मिलेगी.

*आतंकवाद से मुकाबले की तैयारी:*
पहले चार ईपी को लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के दौरान मंजूरी दी गई थी, जबकि पांचवां ईपी आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए था. अब ईपी-6 के तहत भारत तेजी से रक्षा सौदे कर सकेगा. पूरे रक्षा बजट के तहत 15% राजस्व खर्च की सीमा तय की गई है. वित्तीय सलाहकारों की सहमति से ही खरीद होगी और आयात के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी.

*ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए अत्याधुनिक हथियार:*
7 से 10 मई तक चले ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, इस्राइली क्रिस्टल मेज़-2 और रैम्पेज मिसाइल, स्पाइस-2000 बम, फ्रेंच स्कैल्प क्रूज मिसाइल, हैमर गाइडेड बम और हारपी ड्रोन का इस्तेमाल किया. थलसेना ने भी स्कायस्ट्राइकर जैसे ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’, और एक्सकैलिबर जैसे स्मार्ट एक्सटेंडेड रेंज गोले दागे. वायुसेना और सेना की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली में बराक-8 (भारत-इस्राइल संयुक्त परियोजना) और स्वदेशी आकाश मिसाइलें भी शामिल रहीं. सरकार का यह फैसला दर्शाता है कि भारत अब किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए आक्रामक रणनीति और तकनीकी श्रेष्ठता को साथ लेकर चल रहा है. अगर पाकिस्तान ने अपनी हरकतें नहीं रोकीं, तो अगला प्रहार और भी घातक हो सकता है।

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