देशभर की सड़कों पर लाल और पीली टी-शर्ट पहनकर दौड़ते डिलीवरी पार्टनर्स आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं।*
*लेकिन अक्सर सोशल मीडिया और आम चर्चाओं में यह सवाल उठता रहता है कि क्या 10 मिनट में डिलीवरी के चक्कर में उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है और क्या उन्हें उनकी कड़ी मेहनत का वाजिब पैसा मिलता है ?*
*👉 इन तमाम सवालों और बहसों के बीच अब जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने खुद सामने आकर जवाब दिया है और कमाई से लेकर सुरक्षा तक के आंकड़ों का पूरा चिट्ठा खोल दिया है।*
*👉 दीपेंद्र गोयल द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक,*
*डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई कई शुरुआती ऑफिस नौकरियों से बेहतर नजर आती है।*
*साल 2025 में जोमैटो पार्टनर्स की प्रति घंटा औसत कमाई (EPH) 102 रुपये रही है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 11% ज्यादा है।*
*गोयल ने कमाई का एक अनुमानित खाका पेश करते हुए बताया कि अगर कोई पार्टनर महीने में 26 दिन काम करता है और रोजाना 10 घंटे लॉग-इन रहता है, तो उसकी कुल मासिक कमाई लगभग 26,500 रुपये हो सकती है।*
*इसमें से अगर पेट्रोल और बाइक की मेंटेनेंस का 20% खर्चा घटा भी दिया जाए, तो भी हाथ में आने वाली शुद्ध कमाई करीब 21,000 रुपये बैठती है, जो एंट्री-लेवल जॉब्स के लिहाज से एक सम्मानजनक राशि है।*
*👉 काम के घंटों और टिप को लेकर भी सीईओ ने कई दिलचस्प खुलासे किए।*
*उन्होंने बताया कि यह काम लचीलेपन पर आधारित है और ज्यादातर लोग इसे फुल-टाइम नौकरी की तरह नहीं, बल्कि पार्ट-टाइम करते हैं।*
*डेटा के अनुसार, साल भर में औसतन एक पार्टनर ने सिर्फ 38 दिन ही काम किया और केवल 2.3% लोग ही ऐसे थे जिन्होंने साल में 250 दिन से ज्यादा काम किया।*
*वहीं, टिप के मामले में गोयल ने स्पष्ट किया कि टिप का 100% पैसा राइडर को मिलता है, लेकिन भारतीय ग्राहक इसमें थोड़े कंजूस हैं।*
*ब्लिंकिट पर सिर्फ 2.5% और जोमैटो पर 5% ऑर्डर्स में ही टिप मिलती है, जिससे राइडर की एक घंटे में टिप से औसत कमाई महज 2.6 रुपये होती है।*
*👉 सबसे बड़े विवाद यानी ’10 मिनट डिलीवरी’ और सुरक्षा के मुद्दे पर भी कंपनी ने अपना पक्ष रखा।*
*10 मिनट डिलीवरी के कारण राइडर्स पर तेज गाड़ी चलाने के दबाव को खारिज करते हुए गोयल ने बताया कि डिलीवरी का समय गाड़ी की रफ्तार से नहीं, बल्कि स्टोर की लोकेशन और लॉजिस्टिक्स से तय होता है।*
*ब्लिंकिट पर डिलीवरी के लिए तय की जाने वाली औसत दूरी महज 2.03 किलोमीटर होती है, जिसे पूरा करने में 8 मिनट लगते हैं। इस दौरान राइडर्स की औसत रफ्तार 16 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जो कि शहर के ट्रैफिक के हिसाब से काफी सुरक्षित है।*
*इसके अलावा, कंपनी ने पार्टनर्स की सुरक्षा के लिए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं, जिसमें 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, मेडिकल कवर और डिलीवरी के दौरान चोट लगने पर कमाई के नुकसान की भरपाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं।*
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