सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर के कस्बा सरसावा में हुई पांच मौतों के मामले में नया खुलासा हुआ है. पुलिस जाँच में पता चला कि अमीन अशोक राठी ने ही अपने पूरे परिवार को ख़त्म करने के बाद खुदखुशी की है.
अशोक ने खुद को दो गोली मारी है. बावजूद इसके पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. घर में न तो कोई सामान बिखरा मिला और ना ही किसी चीज की चोरी हुई है.
1 मिनट 18 सेकंड के वॉयस मैसेज को पुलिस ने लिया कब्जे में
इस मामले में पुलिस को आत्महत्या के कई अहम सबूत हाथ लगे हैं. रोते-बिलखती बहनें बता रही थी कि मरने से पहले अशोक ने उन्हें व्हाट्सऐप पर वॉइस मैसेज छोड़ा था. इसमें उसने अपने किए की माफ़ी मांगी है और अपनी संपत्ति को दोनों बहनों में बाटंने की बात कही. इस 1 मिनट 18 सेकंड के वॉयस मैसेज को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है.
आपको बता दें कि मंगलवार की सुबह कस्बा सरसावा की कौशिक विहार कॉलोनी में किराए पर रह रहे अशोक राठी समेत परिवार के पांच सदस्यों के शव पड़े मिले थे. सभी शव एक ही कमरे में खून से लथपथ अवस्था में पड़े थे.
चारपाई और बेड पर पड़ी थीं लाशें
अशोक राठी और उसकी पत्नी अजिता के शव चारपाई पर, जबकि बूढ़ी माँ विद्यावती और दोनों बेटों कार्तिक और देव के शव बैड पर सीधे पड़े हुए थे. कमरे के दरवाजे और खिड़कियों में अंदर से कुण्डी लगाईं हुई थी. अशोक के शव के दाहिनी ओर तीन तमंचे और कारतूस पड़े थे.
अशोक के बहनोई की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर छानबीन की तो, कमरे में से नींद और नशीली दवाइयां बरामद हुईं.
नशीली दवाइयां खिलाईं, फिर गोली मार दी
पुलिस के अनुसार अशोक ने पहले पूरे परिवार को खाने में नींद या नशीली दवाइयां खिलाईं और जब वे गहरी नींद में सोये हुए थे, तो सभी के सिरों में सटाकर गोली मारकर हत्या की है.
इस दौरान नींद की गोलियां खाने की वजह से परिवार के कोई भी सदस्य गोली की आवाज नहीं सुन पाया. इसके चलते अशोक ने एक के बाद एक पूरे परिवार को ख़त्म कर दिया.
एसएसपी आशीष तिवारी ने बताया कि अपनी माँ, पत्नी और दोनों बेटों को मारने के बाद अशोक राठी ने सुबह करीब चार बजे व्हाट्सऐप पर वॉयस मैसेज भी भेजा है. पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों बहनों को छोड़ दिया. वहीं अशोक के मोबाइल को जाँच के लिए कब्जे में ले लिया.
वॉयस मैसेज में बयां की पीड़ा
बहनों ने रोते हुए बताया कि वॉयस मैसेज में अशोक ने मंगलवार को सुबह 3:52 बजे भेजा था. 1 मिनट 18 सेकंड के ऑडियो मैसेज में वह कहता है, "पिंकेश और मोना, मुझे माफ़ करना, मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी है. तुम्हारे भाई होकर मैंने बहुत बुरा किया है. मुझे बहुत बड़ी प्रॉब्लम थी. अगर मैं मर जाता, तो उनका ख्याल कौन रखता? इसीलिए मैंने सबको अपने साथ ले जाने का फैसला किया. इसमें किसी की गलती नहीं है, और मेरे जाने के बाद, रक्षाबंधन, भाई-दूज और भात बहुत धूमधाम से मनाना. मेरी मौत का मातम मत मनाना. मैंने जो काम अधूरे छोड़े हैं, उन्हें तुम्हें पूरा करना है. मेरे जाने के बाद मेरी सारी चीज़ें तुम दोनों बहनों की हैं. अब तुम्हें सब कुछ संभालना है. मैं बहुत मजबूर था, मैं अपनी मजबूरी किसी को बता नहीं सका. मैं इतना मजबूर था कि अंत आ गया था, इसीलिए मुझे मरना पड़ा. मुझे माफ़ कर देना मेरी बहनों. मनीष भाई, जयवीर, मेरी दोनों बहनें, और मेरे दोस्तों, प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना, मुझे जाना है, यह मेरी मजबूरी है."
पुलिस के अनुसार यह मैसेज छोड़ने के बाद अशोक ने पहले अपनी छाती में गोली मारी, लेकिन गोली उसे छूकर निकल गई. उसके बाद उसने कनपटी से सटाकर गोली मार ली. जिससे उसकी भी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. पूरे परिवार की मौत से, जहां दोनों बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं कॉलोनी और गांव में मातम पसरा हुआ है.
परिजन पवन राठी ने बताया कि अशोक वैसे तो स्वभाव का बहुत अच्छा था. लेकिन उसने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया यह समझ नहीं आ रहा. घर में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ, जिससे यह कहा जा सके कि कोई बाहरी व्यक्ति घटना को अंजाम दे गया हो. दरवाजे अंदर से बंद मिले.
अशोक को तहसील नकुड़ में पिता की मौत के बाद अमीन की नौकरी मिली थी. वह हंसमुख स्वभाव का इंसान था. उसका किसी से कोई विवाद भी नहीं हुआ था. अपने कार्यालय में भी उसका सबसे अच्छा मेलजोल था. उसने कभी किसी के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की थी.
वहीं चचेरे भाई जितेंद्र का कहना है कि "अशोक मेरे चचेरे भाई थे. घटना के वक्त घर में ये पांच सदस्य थे. कल शाम मेरी उससे बात हुई थी. बातचीत करते वक्त अशोक बहुत हंस-हंस के बात कर रहा था, जिससे कोई समस्या नहीं जाहिर हुई. लेकिन सुबह जब बुरी खबर मिली, तो सबके होश उड़ गए. वह सज्जन प्रवृति का व्यक्ति था. वह ज्यादा किसी से बात भी नहीं करता था. उसे क्या कुछ मानसिक तनाव था. इसके बारे में भी किसी को कुछ नहीं पता था."
जितेंद्र बताते हैं कि हो सके किसी ना किसी डिप्रेशन में रहा हो, लेकिन डिप्रेशन का किसी पता नहीं चला. हालांकि चढीगढ़ पीजीआई से उसका इलाज जरूर चल रहा था.
तीन साल से पीजीआई का चल रहा था इलाज
वहीं एक रिश्तेदार ने बताया कि करीब तीन साल से अशोक मानसिक रूप से बीमार था, जिसका इलाज चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल से चल रहा था. इसके चलते अशोक पहले भी दो बार अपने परिवार को ख़त्म करने की कोशिश कर चुका है. पुलिस को घटना वाले कमरे में भारी मात्रा में नशीली और नींद की गोलियां मिली हैं.
मौत के तीसरे प्रयास में पुख्ता कर ली थी व्यवस्था
पुलिस छानबीन में पड़ोसियों ने बताया कोरोना काल में अशोक ने नींद की दवाइयां खिला कर मारने की कोशिश की थी, लेकिन परिजनों की सतर्कता से सभी जान बच गई थी. वहीं दूसरा प्रयास 5-6 महीने पहले ही किया था. इस बार भी अशोक ने खाने में नशीली दवाइयां मिलाकर खिला दी थीं. तबीयत बिगड़ने पर अन्य परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था, जिससे उनकी जान बच पाई थी. लेकिन इस बार न तो परिवार बच पाया और ना ही अशोक राठी. क्योंकि इस बार अशोक राठी ने खाने में नशीली दवाइयां देने के बाद तमंचों का बंदोबस्त कर लिया था. जैसे ही पूरा परिवार गहरी नींद में सोया हुआ था, अशोक ने पूरे परिवार की गोली मरकर ह्त्या कर दी और उसके बाद खुद की खोपड़ी उड़ा ली.
पुलिस छानबीन में मौके से मिले साक्ष्य और नशीली दवाइयां घटना को आत्महत्या की ओर ले जा रही है. बावजूद इसके पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है. आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन कोई संदिग्ध व्यक्ति उनके घर की ओर आता दिखाई नहीं दिया. इस हत्याकांड में अशोक समेत सभी के सिर में सटाकर गोली मार गई. वहीं कमरा पूरी तरह बंद होने और सर्दी में लोगों के गहरी नींद में सोने की वजह से पड़ोसी भी गोली की आवाज नहीं सुन पाए।
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