*अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि महिला के जननांग में ‘पेनिट्रेशन’ (पैठ) के बिना ही स्खलन (इजैक्युलेशन) हो जाता है, तो इस कृत्य को कानूनन ‘बलात्कार’ नहीं माना जा सकता।*
*भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 की कानूनी व्याख्या करते हुए कोर्ट ने इसे ‘बलात्कार का प्रयास’ माना है, जो IPC की धारा 376 और 511 के तहत दंडनीय अपराध है।*
*इस फैसले के साथ ही अदालत ने एक व्यक्ति की सजा को बलात्कार से बदलकर बलात्कार की कोशिश में तब्दील कर दिया है।*
*⚖️ 20 साल पुराने मामले में साक्ष्यों के आधार पर पलटा फैसला :*
*हाई कोर्ट की खंडपीठ ने यह अहम टिप्पणी करीब 20 साल पुराने एक आपराधिक मामले की अपील पर सुनवाई करते हुए की। इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। लेकिन जब हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों का दोबारा बारीकी से मूल्यांकन किया, तो पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि घटना के वक्त वास्तव में ‘पेनिट्रेशन’ हुआ था। कोर्ट ने कहा कि बलात्कार की परिभाषा के तहत पेनिट्रेशन का होना अनिवार्य शर्त है। केवल पुरुष जननांग का महिला के निजी अंग के संपर्क में आना या बिना पैठ के स्खलन होना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है।*
*⚖️ गंभीर अपराध है, लेकिन सजा कानून के दायरे में होगी तय :*
*अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि भले ही यह कृत्य तकनीकी रूप से ‘बलात्कार’ की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन यह एक बेहद गंभीर आपराधिक कृत्य है और इसे किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने माना कि आरोपी की मंशा स्पष्ट रूप से बलात्कार करने की थी, लेकिन वह अपने नापाक मंसूबों में पूरी तरह सफल नहीं हो सका। अदालत ने जोर देकर कहा कि पीड़िता की गरिमा और शारीरिक स्वायत्तता पर हमला होने पर सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन सजा तय करते वक्त कानूनी प्रावधानों और अपराध के तय मानकों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।*
*⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘रेप की कोशिश’ पर दिया था कड़ा संदेश :*
*बलात्कार और उसके प्रयास के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करने वाले इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी यौन उत्पीड़न के मामलों में एक बड़ा फैसला सुनाया था। सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया था कि किसी बच्ची के ब्रेस्ट को पकड़ना, उसके कपड़े (पायजामे का नाड़ा) खींचना या उसे जबरन खींचने की कोशिश करना सीधे तौर पर ‘रेप की कोशिश’ के दायरे में आता है। अदालतों के ये फैसले स्पष्ट करते हैं कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानूनी बारीकियों के साथ-साथ अपराध की गंभीरता को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
0 Comments