संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्व में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की एक महीने तक चलने वाली अहम बैठक शुरू हो गई है।*
*लेकिन इस बैठक की शुरुआत में ही अमेरिका को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है।*
*बैठक में 34 देशों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष चुना गया है, जिसमें ईरान ने भी अपनी जगह पक्की कर ली है।*
*अमेरिका के भारी विरोध और एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बावजूद ईरान को एनपीटी के भीतर उपाध्यक्ष का पद मिल गया है।*
*आपको बता दें कि एनपीटी में एक अध्यक्ष और 34 उपाध्यक्ष हर 5 साल पर चुने जाते हैं और इस बार अध्यक्ष की कुर्सी चीन व रूस के करीबी माने जाने वाले वियतनाम को मिली है।*
💥🌏 *121 देशों के समर्थन से ईरान ने मारी बाजी* 💥🌏
*समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को इस पद से दूर रखने के लिए आखिरी वक्त तक अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन 121 देशों के भारी समर्थन के कारण ईरान ने यह कुर्सी हासिल कर ली। इस जीत के बाद ईरान का स्पष्ट कहना है कि उसके नेता ने हमेशा से परमाणु हथियारों का विरोध किया है और अमेरिका जानबूझकर पूरी दुनिया में उनके खिलाफ सिर्फ झूठ फैलाने का काम कर रहा है।*
💥🌏 *अमेरिका ने बताया ‘अपमान’, कहा- खत्म हो जाएगी विश्वसनीयता* 💥🌏
*परमाणु अप्रसार संधि के अध्यक्ष हेंग वियत के अनुसार, गुट निरपेक्ष देशों ने मजबूती से ईरान का समर्थन किया। हालांकि यूएई और अमेरिका जैसे देशों ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन उनकी एक न चली। ईरान की इस जीत पर अमेरिकी शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने भड़कते हुए इसे एनपीटी के लिए एक बड़ा अपमान करार दिया है। येव ने कहा कि ईरान ने लंबे समय से परमाणु अप्रसार नीति की प्रतिबद्धताओं के प्रति अपनी अवमानना दिखाई है, ऐसे में उसे इस पद के लिए चुना जाना बेहद शर्मनाक और एनपीटी की विश्वसनीयता को खत्म करने वाला फैसला है।*
💥🌏 *ईरान का करारा पलटवार- अमेरिका ने ही किया है परमाणु बम का इस्तेमाल* 💥🌏
*अमेरिका की इस तिलमिलाहट पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में ईरान के दूत रजा नजाफी ने भी करारा पलटवार किया है। नजाफी ने सीधे तौर पर अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने हकीकत में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में उसे इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक हक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका खुद दुनिया को उपदेश देते हुए अपने परमाणु शस्त्रागार का लगातार विस्तार करने में लगा हुआ है।*
💥🌏 *क्या है परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) ?* 💥🌏
*परमाणु अप्रसार संधि का निर्माण 1970 में शीत युद्ध के दौरान दुनिया पर मंडरा रहे परमाणु हमले के खतरे को देखते हुए किया गया था। संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में काम करने वाले इस संगठन का मुख्य मकसद पूरी दुनिया को परमाणु तबाही से बचाना है। वर्तमान में 190 से ज्यादा देश इसके सदस्य हैं। इस संगठन के मुख्य रूप से तीन बड़े उद्देश्य हैं। पहला यह कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, वे भविष्य में इसे हासिल करने का प्रयास नहीं करेंगे। दूसरा उद्देश्य यह है कि जिन देशों के पास वर्तमान में परमाणु हथियार मौजूद हैं, वे धीरे-धीरे इसे कम करने की दिशा में काम करेंगे। वहीं, इसका तीसरा और अहम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल सिर्फ बिजली उत्पादन और शांतिपूर्ण कार्यों के लिए ही किया जाएगा।
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