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आसमान में सफर करने वालों के लिए डराने वाली खबर सामने आई


*जेट फ्यूल (ATF) की लगातार बढ़ती कीमतों ने भारत की बड़ी एयरलाइन कंपनियों की टेंशन को चरम पर पहुंचा दिया है।*

*हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि अगर जल्द ही कोई सुधार नहीं हुआ, तो देश में फ्लाइट सर्विस के पूरी तरह से ठप होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।* 

*भारत की शीर्ष एयरलाइन कंपनियों जिसमें एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल हैं, उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस’ (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है और उड़ानों को जारी रखने के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।*


✈️🇮🇳 *बंद होने की कगार पर पहुंची पूरी एयरलाइन इंडस्ट्री* ✈️🇮🇳

*संकट की भयावहता को बयां करते हुए एफआईए ने सरकार को बताया है कि मौजूदा समय में भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री भयानक दबाव से गुजर रही है और यह पूरी तरह से बंद होने या अपना कामकाज रोकने की कगार पर पहुंच चुकी है। संगठन के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें इतनी ज्यादा अनिश्चित हो गई हैं कि इसका एयरलाइन कंपनियों के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के ऑपरेशंस पर बेहद विनाशकारी असर पड़ रहा है। लगातार बदलते दामों ने एयरलाइंस के रूट का पूरा अर्थशास्त्र ही बिगाड़ कर रख दिया है और उन्हें अपने नेटवर्क की व्यावहारिकता पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।*


✈️🇮🇳 *विदेशी रूट पर भारी नुकसान, प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहीं कंपनियां* ✈️🇮🇳

*एफआईए ने मौजूदा एड-हॉक प्राइसिंग सिस्टम की कड़ी आलोचना करते हुए बताया है कि विदेशी उड़ानों के कामकाज के लिए एटीएफ की कीमतों में अचानक 73 से 75 रुपये प्रति लीटर तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बेतहाशा वृद्धि के कारण कई अंतरराष्ट्रीय रूट अब पूरी तरह से घाटे का सौदा बन गए हैं। इसके चलते भारतीय एयरलाइंस का मुनाफा तेजी से गिर रहा है और उन्हें उन विदेशी एयरलाइंस के सामने टिकने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो कम लागत वाले हब से अपना संचालन कर रही हैं।*


✈️🇮🇳 *सरकार से टैक्स छूट की मांग, वरना रद्द होंगी ढेरों उड़ानें* ✈️🇮🇳

*इस भारी वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए एफआईए ने सरकार के सामने कुछ इमरजेंसी मांगें रखी हैं। इसमें घरेलू ऑपरेशंस के लिए एटीएफ पर लगने वाले 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को कुछ समय के लिए तुरंत प्रभाव से निलंबित करना शामिल है। इसके अलावा एक स्टैंडर्ड क्रैक बैंड प्राइसिंग मैकेनिज्म को दोबारा लागू करने और प्रमुख एविएशन हब में वैट कम करने की भी जोरदार मांग की गई है। एफआईए ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव नहीं किया गया और मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ती रहीं, तो कंपनियों को मजबूरन अपनी उड़ानें रद्द करने की नौबत आ जाएगी। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि कनेक्टिविटी घटने के साथ-साथ यात्रियों के लिए हवाई किराया आसमान छूने लगेगा।




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