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मां को गुजारा भत्ता न देने पर कोर्ट ने बेटे को जेल भेजने का दिया आदेश

कासरगोड (केरल) : कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी बुजुर्ग मां को भरण पोषण की राशि का भुगतान करने में विफल रहने पर कारावास का आदेश दिया है.
कन्हानगढ़ आरडीजो कोर्ट ने यह आदेश दिया. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत इस तरह के फैसले असामान्य है.
अदालत ने आदेश दिया कि मदिकाई मलप्पाचेरी, वदुथलाकुझी के निवासी प्रतीश को होसदुर्ग उप जेल में तब तक भेजा जाए जब तक कि वह अपनी मां, अम्बालाथारा गांव के चोमनकोड की मूल निवासी एलियम्मा जोसेफ पर बकाया 12,000 रुपये का छह महीने का बकाया नहीं चुका देता.
कोर्ट ने हिरासत का आदेश 2007 अधिनियम की धारा 5(8) और बीएनएसएस अधिनियम की धारा 144 के तहत दिया गया था. यह मामला तब शुरू हुआ जब ट्रिब्यूनल ने 18 मार्च, 2025 को 2,000 रुपये का मासिक भरण-पोषण आदेश जारी किया. हालांकि, बार-बार भुगतान न करने पर, एलियम्मा ने 24 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मडिकई ग्राम अधिकारी के माध्यम से बेटे को नोटिस भेजा गया. प्रतीश ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया.
कई बार सुनवाई और अनुपालन के अवसरों के बावजूद, प्रतीश ने बार-बार भुगतान करने में अपनी अनिच्छा व्यक्त की. 9 सितंबर को अंतिम सुनवाई में, नीलेश्वरम पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और आरडीओ कोर्ट में पेश किया, जहां उसने फिर से कहा कि वह भुगतान करने को तैयार नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने उसको कारावास का आदेश दिया.
कानूनी पेशेवरों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए भरण-पोषण के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन कारावास तक ले जाने वाले सख्त प्रवर्तन दुर्लभ है, जिससे यह फैसला जिले में सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है.
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक संरक्षण एवं कल्याण अधिनियम क्या है?
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 भारत में वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के कल्याण, संरक्षण और सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियमित एक महत्वपूर्ण कानून है.
यह कानून केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (अधिनियमन के समय इसकी स्थिति के अनुसार) को छोड़कर पूरे देश में लागू है. यह भारत के संविधान में निहित राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों की भावना को प्रतिबिंबित करता है.
अधिनियम के उद्देश्य
अनिवार्य भरण-पोषण: अधिनियम के तहत बच्चों (वयस्क पुत्र, पुत्री और पोते-पोतियों सहित) और रिश्तेदारों के लिए वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता को वित्तीय सहायता और देखभाल प्रदान करना अनिवार्य है, यदि वे ऐसा करने में सक्षम हैं.
कल्याण एवं सुरक्षा: इसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल, आवास और अन्य सामाजिक सेवाओं से संबंधित प्रावधानों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण सुनिश्चित करना है.
उपेक्षा के विरुद्ध संरक्षण: यह अधिनियम बुजुर्ग व्यक्तियों की उपेक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है.
न्यायाधिकरणों की स्थापना: अधिनियम में भरण-पोषण से संबंधित दावों को शीघ्र और प्रभावी तरीके से निपटाने के लिए भरण-पोषण न्यायाधिकरणों और अपीलीय न्यायाधिकरणों के गठन का प्रावधान है.

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