योग, संस्कृति और संस्कार का दिव्य संगम बना ‘भारतीय परिधान में योग’ आयोजन
लखीमपुर-खीरी। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती, अखण्ड दीप के शताब्दी वर्ष एवं ज्ञान, विद्या, चेतना और नवचेतना के प्रतीक पावन पर्व बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर योग रंजन फाउंडेशन द्वारा आज नगर के अटल बिहारी वाजपेई उद्यान, आवास विकास कॉलोनी में विशेष योग साधना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
इस अवसर पर “भारतीय परिधान में योग” विषय पर आधारित सामूहिक योग साधना आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में योग साधकों, युवाओं एवं महिलाओं ने सहभागिता की। प्रतिभागियों द्वारा प्रज्ञायोग सहित विभिन्न योगासनों एवं प्राणायाम का अभ्यास किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योग को उसकी मौलिक भारतीय आत्मा से जोड़ते हुए शरीर, मन एवं चेतना के समन्वय को जीवनशैली में आत्मसात करना रहा।
आयोजन के दौरान योग रंजन फाउंडेशन के संस्थापक योगाचार्य प्रिंस रंजन बरनवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में वस्त्र केवल शरीर का आवरण नहीं, बल्कि संस्कार, साधना और सात्त्विक जीवन दृष्टि के प्रतीक हैं। जब योग विद्या भारतीय परिधान के साथ समन्वित होती है, तब योग केवल शारीरिक व्यायाम न रहकर जीवन को संतुलित एवं समृद्ध करने वाला विज्ञान बन जाता है।
कार्यक्रम में योगाचार्य प्रगति बरनवाल द्वारा बसंत पंचमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने माँ सरस्वती की आराधना के इस पावन दिवस को ज्ञान, विवेक और चेतना के जागरण का पर्व बताया।
माँ सरस्वती की आराधना के इस शुभ अवसर पर योग, संस्कृति और संस्कार का यह समन्वय उपस्थित जनसमूह के लिए एक दिव्य एवं प्रेरक अनुभूति का कारण बना। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा साड़ी एवं पुरुषों द्वारा धोती–कुर्ता धारण कर किए गए योगाभ्यास ने भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत सुंदर और प्रेरणादायी दृश्य प्रस्तुत किया। उपस्थित साधकों ने इसे भारतीय परंपरा से जुड़ने का एक अनूठा एवं सार्थक प्रयास बताया।
कार्यक्रम के अंत में योग रंजन फाउंडेशन की योग प्रशिक्षक राजदीपिका तिवारी द्वारा प्रीति शुक्ला, अमूलदीप तिवारी, पारुल सिंह, नूपुर गुप्ता, शिवानी राठौर सहित योग रंजन योगिनी समूह का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि संस्था भविष्य में भी योग, संस्कृति और संस्कार को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से ऐसे आयोजनों का निरंतर आयोजन करती रहेगी।
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