ताजा समाचार

20/recent/ticker-posts

दिल्ली विश्वविद्यालय में हुआ प्रोफेसर केपी सिंह पर आधारित पुस्तकों का लोकार्पण


नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विभागाध्यक्ष; दिल्ली विश्वविद्यालय गांधी भवन के निदेशक प्रो.के.पी. सिंह के 25 वर्ष ( 2001-2026) के शैक्षणिक यात्रा को समर्पित तीन पुस्तकों का लोकार्पण समारोह गांधी भवन परिसर में संपन्न हुआ।इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली पुस्तकालय संघ द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दिल्ली विश्वविद्यालय कुल गीत से हुआ।समारोह के मुख्य अतिथियों का परिचय डॉ.मनीष कुमार ने दिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आद्या जागिनी मठ सूरत के पीठाधीश जगद्गुरु धर्माचार्य श्री 108 सूर्यनारायण दास जी महाराज जी;कार्यक्रम के अध्यक्ष डीन कॉलेजेज प्रो.बलराम पाणी जी;अन्य अतिथि प्रो.बी.पी मंगला;प्रो.इंद्र मोहन कपाही;प्रो.प्रेम सिंह; प्रो.राकेश कुमार भट्ट का अभिनंदन अंगवस्त्र,पुष्प- गुच्छ,स्मृति चिन्ह देकर किया गया।कार्यक्रम के केंद्र बिंदु प्रो.के पी सिंह का स्वागत दिल्ली पुस्तकालय संघ के सभी पदाधिकारियों डॉ ज्ञानेंद्र नारायण सिंह,प्रो.मीरा आदि ने किया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन प्रो.प्रेरणा मल्होत्रा ने किया।
    प्रो.प्रेम सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रो.बीपी मंगला,डॉ.रंगनाथन के बाद प्रो.केपी सिंह पुस्तकालय सूचना विभाग के भीष्म पितामह हैं।उन्होंने प्रो.केपी सिंह के विश्वविद्यालय सेवा के 25 वर्षों की यात्रा के लिए बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की। प्रो.केपी सिंह के अकादमिक जीवन-यात्रा पर आधारित पुस्तक,'"Silver Linings Shaping Minds and Institution" पर चर्चा करते हुए प्रो. प्रेम सिंह ने बताया कि इस पुस्तक में प्रो.सिंह की अकादमिक यात्रा के अलग अलग पड़ावों और उपलब्धियों के विषय में संपादकों एवं लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं।
      प्रो.बी.पी.मंगला ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि गुरुओं का भी कभी कभी भाग्य होता है जब प्रो.केपी सिंह जैसे शिष्य उनके हिस्से में आते हैं।उन्होंने कहा है कि निस्वार्थ भाव से परिपूर्ण केपी सिंह जहां रहते है;वह स्थान वैभवपूर्ण हो जाता है। प्रो इंद्र मोहन कपाही ने कहा कि जब आप पुस्तकालय विज्ञान विभाग में घुसेंगे तो आपको लगेगा कि किसी अलग दुनिया में आ गए हैं। केपी सिंह ने यह करके दिखाया कि अपनी कर्मभूमि को और श्रेष्ठ कैसे बनाएं। अपनी तरफ से कुछ भी सहयोग करने में संकोच नहीं करेंगे।अलग-अलग स्थानों, समितियों,कार्यक्रमों से प्राप्त यात्रा व्यय धनराशि को अलग कोष में रखकर और अपनी ओर से राशि मिलाकर उसको दुगुना करना और फिर विभाग में लगा देना।यह कला इनसे सीखनी चाहिए। इनको जहां भी दायित्व मिला उस दायित्व को अपने बहुआयामी व्यक्तित्व से श्रेष्ठ बनाया हैं। 
     प्रो.बलराम पाणी ने संबोधित करते हुए कहा पुस्तकें हमारी पहचान हैं और पुस्तकालय विज्ञान विभाग की अद्वितीय पहचान के पी सिंह जी से हैं।अपनी सृजन कला द्वारा निरंतर रचना कर्म करते रहते हैं;यह इनके अद्वितीय व्यक्तित्व की पहचान है।प्रत्येक कार्य सर्वश्रेष्ठ रूप में हो।गुणवत्ता को वरीयता देना इनकी सबसे विशिष्ट पहचान है।केपी सिंह आपको हमेशा मुस्कराते हुए मिलेंगे।स्व-प्रेरणा से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कर्त्तव्यपरायणता के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। 
        प्रो.केपी सिंह पर केंद्रित दूसरी पुस्तक ,"A Leader's Ascent: Professor KP Singh Journey in the Spotlight" पर अपने विचार रखते हुए पुस्तकालय विज्ञान विभाग के वरिष्ठ  प्रो.आर के भट्ट ने कहा कि हमारे बीच में प्रो.केपी सिंह जैसा ऐसा कर्मयोगी है जो यह संकल्प करके आया है कि विभाग को विश्व का श्रेष्ठ विभाग बनाना है।उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में प्रो. के पी सिंह के शोध पत्रों की समीक्षाओं सहित,उनकी अकादमिक यात्रा के पड़ाव सम्मिलित हैं। 
     समारोह में प्रो.के पी सिंह पर आधारित तीन पुस्तकों 
1."Silver Linings:Shaping Minds and Institution ".
2."A Leader's Ascent: Professor KP Singh's Journey in the Spotlight."
3."प्रोफेसर के पी सिंह मीडिया के आईने में" का विमोचन किया गया।इसके बाद पूर्व विद्यार्थियों द्वारा प्रो.केपी सिंह का भव्य स्वागत किया गया।मुख्य अतिथि जगद्गुरु धर्माचार्य श्री 108 सूर्य नारायणदास ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि प्रो.केपी सिंह कर्मयोगी ऋषि हैं।ऋषि इसलिए कि वो निश्छल निर्मल और उत्कृष्ट विराट हृदय से कार्य करते हैं। ऋषि मंत्रदृष्टा होते हैं और एक पुस्तकालय विज्ञान का प्रोफेसर भी ऐसा ही मंत्रदृष्टा होता है।इन्होंने कर्म को कार्य के रूप में परिलक्षित किया है।पुस्तकालय विज्ञान विभाग अपनी उत्कृष्टता के लिए सदैव जाना जाएगा।प्रो.केपी सिंह सूर्य हैं और उनके शिष्य उसकी किरणें हैं।ये चंद्रमा हैं और उनकी शीतलता उनके शिष्य हैं।उन्होंने प्रो.केपी सिंह जी को 25 वर्ष की अकादमिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। 
    अंत में दिल्ली पुस्तकालय संघ के महासचिव डॉ ज्ञानेंद्र नारायण सिंह ने सभी का धन्यवाद और प्रो केपी सिंह ने आभार प्रकट किया।कार्यक्रम में प्रो.धनंजय जोशी,प्रो.निरंजन कुमार,प्रो. दर्शन पाण्डेय,प्रो.मनोज कुमार कैन,प्रो मोहन,प्रो केपी चिंदा,प्रो संजीव तिवारी,प्रो एच एस प्रसाद, डॉ चेतन सिंह,श्री ऋषि शर्मा,डॉ गरिमा गौड़,डॉ प्रवीण बब्बर, डॉ महेश चंद्र,डॉ गरिमा शर्मा,प्रो.हंसराज सुमन,डॉ बेबी,डॉ हंसराज,डॉ कर्णिका गौड़,अधिवक्ता अश्विनी यादव, डॉ पिंकी शर्मा,डॉ किम्मी,प्रो एमपी सिंह,डॉ नरेंद्र रावत, डॉ विनय गुप्ता, डॉ संजीव शर्मा,डॉ अशोक कुमार,डॉ रितु वर्मा,डॉ दीप्ति सिंह,डॉ सुरेखा कॉल,डॉ पूजा जैन,डॉ प्रमोद शर्मा,डॉ बबीता गौड़ ,डॉ अनवर जहान, आचार्य विश्वमोहन, कार्यालय प्रभारी संजीव चौहान, एमटीएस बलबीर और अशोक,सहित अन्य प्राध्यापक,प्राचार्य,शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

Post a Comment

0 Comments