जबलपुर : पदोन्नति में आरक्षण के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया है. याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को सरकार की ओर से बताया गया कि पूर्व में सरकार की ओर से पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिए जाने के संबंध में अंडरटेकिंग दी गई थी, जिसके कारण सामान्य और आरक्षित दोनों वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं.
प्रमोशन में आरक्षण के नए नियम के खिलाफ याचिका
गौरतलब है कि भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि प्रमोशन में आरक्षण नियम वर्ष 2022 के नियमों को हाईकोर्ट द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है. इसके बाद मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे और मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर प्रमोशन में आरक्षण का नया नियम बना दिया.
सरकार ने दी थी अंडरटेकिंग
याचिका में बताया गया कि प्रदेश सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण 2025 के नियम में क्रीमी लेयर बनाया लेकिन इस क्रीमी लेयर में एससी एसटी वर्ग को शामिल नहीं किया गया. इसी के चलते हाईकोर्ट में ये याचिका दायर की गई. याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अंडरटेकिंग दी थी कि अगली सुनवाई तक नई पॉलिसी के तहत किसी को प्रमोशन नहीं दिए जाएंगे.
आरक्षण की पिछली सुनवाई में क्या हुआ?
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वर्गवार आंकड़े पेश किए थे, साथ ही नई और पुरानी नीति का तुलनात्मक चार्ट पेश किया था. इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि पदोन्नति में आरक्षण देने का आधार आबादी है या सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व? और इसे लेकर विस्तृत आंकड़ों के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी पूछा था कि नई पॉलिसी में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं.
मामले की फिर हुई सुनवाई, सरकार ने पेश किया जवाब
याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान पूर्व एडिशनल अटॉर्नी जनरल सीएस वैद्यनाथन वीसी के माध्यम से उपस्थित हुए. उन्होंने सरकार की प्रमोशन में आरक्षण के संबंध में दी गई अंडरटेकिंग के संबंध में चर्चा करने के लिए आग्रह किया. याचिकाकर्ताओं के आग्रह पर युगलपीठ ने सरकार के जवाब की कॉपी सभी पक्षकारों को प्रदान करने के निर्देश जारी करते हुए अगली सुनवाई 16 सितम्बर को निर्धारित की है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने पैरवी की.
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